वक़्त अच्छे-अच्छो को झुकाता है
और वक़्त सबका आता है!
वो दे तो शुक्र उसका, न दे तो मलाल नहीं
उसके फैसले कमाल हैं, उन फैसलों पर सवाल नहीं
उस उड़ान से काफी उम्मीद है
जो मेरी खुद की होगी..
ये हक़िकत है इत्तेफाक नहीं
हम जैसा होना कोई मजाक नही
मैं तो कब का आगे बढ़ चुका हूं
वक़्त को कहो कि अब मेरे साथ चलें…
हमने मेहनत भी की और दिल भी लगाया…
हमने सिर्फ नाम ही नहीं पैसा भी खूब कमाया!
आग लगाना मेरी फितरत में नहीं
मेरी सादगी से लोग जले तो इसमें मेरा क्या कसूर!
जाने वालों को रस्ता दिया करो…
वास्ता दोगे तो सर पे चढेंगे…
आग लगाना मेरी फितरत में नहीं
मेरी सादगी से लोग जले तो इसमें मेरा क्या कसूर!
कितना भी तुम गले लगाओ लाख निभा लो यारी.. सुधर नहीं सकते है वो जिनकी फितरत में है गद्दारी!!
हैरत किस बात कि! टूटे है तो चुभेंगे भी..
अकेलेपन को पिघला कर उसमें व्यस्त रहता हूँ, इन्सान हूँ मुरझा कर भी मस्त रहता हूँ!!दुनिया को लगते हैं बुरे अंदाज मेरे,
लोग कहाँ जानते हैं गहरे राज़ मेरे।
दिल की कीमत तो मोहब्बत के सिवा कुछ न थी,
जितने भी मिले, सूरत के खरीदार मिले।
वो खुश है बिछड़ कर मुझसे,
ऐ दुनिया बेवफ़ा न कह उसको।
आवारगी मेँ हद से गुज़र जाना चाहिये,
लेकिन कभी-कभार तो घर जाना चाहिये।
घायल कर के मुझे उसने पूछा
करोगे क्या फिर मोहब्बत मुझसे,
लहू-लहू था दिल मेरा मगर...
होंठों ने कहा बेइंतहा-बेइंतहा।

