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Desh Bhakti Shayari | जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो जब आँख बंद हो तो यादेँ हिन्दुस्तान की हो

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 जब आँख खुले तो धरती हिन्दुस्तान की हो

जब आँख बंद हो तो यादेँ हिन्दुस्तान की हो

हम मर भी जाए तो कोई गम नही लेकिन

मरते वक्त मिट्टी हिन्दुस्तान की हो।


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“अगर मैं जन्म लू दुबारा इंसान में

भगवन देना मिट्टी हिन्दुस्तान की

होंठो पे गंगा हो हाथो में तिरंगा हो”


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अब तक जिसका खून न खौला,


वो खून नहीं वो पानी है


जो देश के काम ना आये ,


वो बेकार जवानी है


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कभी सनम को छोड़ के देख लेना,


कभी शहीदों को याद करके देख लेना,


कोई महबूब नहीं है वतन जैसा यारो,



मेरी तरह देश से कभी इश्क करके देख लेना..


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दे सलामी इस तिरंगे को जिससे तेरी शान है.


सिर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं .


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कुछ नशा तिरंगे की आन का है,


कुछ नशा मातृभूमि की शान का है,


हम लहरायेंगे हर जगह ये तिरंगा,


नशा ये हिन्दुस्तां के सम्मान का है.


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मेरी धडकनो में धडकता रहे तु,


मेरे देश तुझको नमन है मेरा,


जीऊं तो जुबां पर तेरा नाम हो


मरूं तो तिरंगा कफन हो मेरा।.


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मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ


यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ,


मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की,


तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।.


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जोश भर देने वाली देशभक्ति शायरी

आज़ादी की कभी शाम ना होने देंगे,


शहीदों की कुर्बानी बदनामी ना होने देंगे,


बची हो जो एक बूंद भी लहू की तब तक


भारत माँ का आँचल नीलाम ना होने देंगे !.


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चले आओ मेरे परिंदों लौट कर अपने आसमान में,


देश की मिटटी से खेलो, दूर-दराज़ में क्या रक्खा है


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शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले,

वतन पे मर मिटनेवालों का बाकी यही निशां होगा


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अनेकता में एकता ही इस देश की शान है,

इसीलिए मेरा भारत महान है


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जो देश के लिए शहीद हुए

उनको मेरा सलाम है

अपने खूं से जिस जमीं को सींचा

उन बहादुरों को सलाम है


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खून से खेलेंगे होली,

अगर वतन मुश्किल में है

सरफ़रोशी की तमन्ना

अब हमारे दिल में है


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खुशनसीब हैं वो जो वतन पर मिट जाते हैं,

मरकर भी वो लोग अमर हो जाते हैं,

करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पे मिटने वालों,

तुम्हारी हर साँस में तिरंगे का नसीब बसता है…


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लिख रहा हूं मैं अजांम जिसका कल आगाज आयेगा,

मेरे लहू का हर एक कतरा इकंलाब लाऐगा

मैं रहूँ या ना रहूँ पर ये वादा है तुमसे मेरा कि,

मेरे बाद वतन पर मरने वालों का सैलाब आयेगा


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मुझे ना तन चाहिए, ना धन चाहिए

बस अमन से भरा यह वतन चाहिए

जब तक जिन्दा रहूं, इस मातृ-भूमि के लिए

और जब मरुँ तो तिरंगा कफ़न चाहिये


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अपनी आज़ादी को हम हरगिज़ मिटा सकते नहीं

सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं


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इतनी सी बात हवाओं को बताये रखना

रौशनी होगी चिरागों को जलाये रखना

लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने

ऐसे तिरंगे को हमेशा दिल में बसाये रखना


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देशभक्तों से ही देश की शान है

देशभक्तों से ही देश का मान है

हम उस देश के फूल हैं यारों

जिस देश का नाम हिंदुस्तान है


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लहराएगा तिरंगा अब सारे आसमान पर

भारत का ही नाम होगा सबकी जुबान पर

ले लेंगे उसकी जान या खेलेंगे अपनी जान पर

कोई जो उठाएगा आँख हिंदुस्तान पर



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गुलाम बने इस देश को आजाद तुमने कराया है

सुरक्षित जीवन देकर तुमने कर्ज अपना चुकाया है

दिल से तुमको नमन हैं करते

ये आजाद वतन जो दिलाया है

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